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आज अमर गणतंत्र है.(कविता)

Posted On: 27 Jan, 2018 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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आज अमर गणतंत्र है,

आल्हादित ये  पल हैं.

मधु  खुशियों का संगम है,

तंत्र आस्था की उमंग है.

लोकशाही की गजब मिशाल,

जनखुशियों का सम्बल है.

थाती है अपने पुरखों की,

इसमें गजराज का बल है.

पुरा साहित्य बतलाता,

विश्व  प्रथम गणराज्य  है.

अनेकता में एकता की शान,

स्वराज तंत्र का बल है.

आकर जो यहां बस गया,

बगिया का एक सुमन है.

गुणसूत्रों से हममें आया,

गणतंत्र का सम्मान है.

देश प्रथम संदेह नहीं,

सब धर्मों का मूलमंत्र है.

तंत्र करता है भेद नही,

यह भारतीय गणतंत्र है.

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